Parimal - परिमल
Suryakant Tripathi Nirala - सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
Parimal - परिमल - 1st Ed. - New Delhi, India Rajkamal Prakashan 2024 - 205 p.
9788171782192
आध्यात्मिकता
कल्पना और अनुभूति
काव्यात्मक भाषा
प्रकृति और मानव का संबंध
प्रकृति चित्रण
प्रेम और भावनाएँ
भावनात्मक गहराई
मानवीय संवेदना
व्यक्तिगत अभिव्यक्ति
साहित्यिक नवाचार
सौंदर्य और संवेदनशीलता
छायावाद (Chhayavaad)
891 / PAR-N
Parimal - परिमल - 1st Ed. - New Delhi, India Rajkamal Prakashan 2024 - 205 p.
9788171782192
आध्यात्मिकता
कल्पना और अनुभूति
काव्यात्मक भाषा
प्रकृति और मानव का संबंध
प्रकृति चित्रण
प्रेम और भावनाएँ
भावनात्मक गहराई
मानवीय संवेदना
व्यक्तिगत अभिव्यक्ति
साहित्यिक नवाचार
सौंदर्य और संवेदनशीलता
छायावाद (Chhayavaad)
891 / PAR-N