| 000 | 01401nam a22001817a 4500 | ||
|---|---|---|---|
| 003 | NITTTR | ||
| 005 | 20260302113726.0 | ||
| 008 | 260302b |||||||| |||| 00| 0 eng d | ||
| 040 |
_bEnglish-Hindi _cIN-NITTTR |
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| 082 |
_2First _a891.433 _bBHA-S |
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| 100 |
_aMannu Bhandari - मन्नू भंडारी _d2016 |
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| 245 |
_aSampurna Upanyas - संपूर्ण उपन्यास _hHindi |
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| 250 | _aFirst | ||
| 260 |
_aDelhi, India _bRadhakrishna Prakashan _c1 January 2016 |
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| 300 |
_a640 p. _c 20.32 x 12.7 x 1.27 cm _fVolume |
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| 650 |
_aहिंदी उपन्यास / आधुनिक हिंदी साहित्य, सामाजिक यथार्थ / सामाजिक समीक्षा, स्त्री-परक दृष्टिकोण / नारी विमर्श / महिला-मानस, पारिवारिक रिश्ते / पारिवारिक मनोवैज्ञानिकता, मनोवृत्ति / अंतर्मन-विश्लेषण, नैतिकता / मूल्य-संघर्ष, शहर-ग्रामीण जीवन अंतर, भाषा-शैली / सहज व नैसर्गिक संवाद व्यंग्य / ,उपहास / सामाजिक आलोचना _zIndia |
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| 942 |
_2ddc _cBK _eFirst _n1 |
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| 999 |
_c35866 _d35866 |
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